
वनों को आग से बचाने गंडई क्षेत्र के गाँवों में गूँजी ‘नुक्कड़ नाटक’ की थाप: ग्रामीणों ने लिया जंगल बचाने का संकल्प
गंडई पंडरिया:- वनों की हरियाली और वन्य प्राणियों की सुरक्षा के लिए छत्तीसगढ़ वन विभाग अब ‘जन-भागीदारी’ का सहारा ले रहा है। वनमंडलाधिकारी खैरागढ़ के कुशल मार्गदर्शन में, वन परिक्षेत्र गंडई के अंतर्गत आने वाले ग्राम अचानकपुर, देवरच्चा और झिरिया में जागरूकता का अनूठा शंखनाद हुआ।
कला के जरिए दिया ‘अग्नि सुरक्षा’ का संदेश
रविवार, 08 फरवरी को आयोजित कार्यक्रम में कलाकारों ने नुक्कड़ नाटक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से ग्रामीणों का दिल जीत लिया। गीतों और संवादों के जरिए यह संदेश दिया गया कि एक छोटी सी चिंगारी कैसे पूरे जंगल और जीव-जंतुओं के अस्तित्व को मिटा सकती है।

नाटक के मुख्य बिंदु
सावधानी ही सुरक्षा: बीड़ी-सिगरेट के जलते टुकड़े और महुआ बीनने के लिए पत्तों में आग लगाने जैसी आदतों से बचने की सलाह।
कानूनी चेतावनी: वनों में जानबूझकर आग लगाना न केवल प्रकृति के विरुद्ध है, बल्कि यह एक दंडनीय अपराध भी है।
सामूहिक जिम्मेदारी: जंगल की आग बुझाने में ग्रामीणों और चरवाहों की सक्रिय भूमिका पर जोर।
“जंगल बचेगा, तभी हम बचेंगे”
कार्यक्रम के दौरान वन विभाग के अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील की कि वनाग्नि की सूचना मिलते ही तत्काल विभाग को सूचित करें। इस दौरान ग्राम वन सुरक्षा समितियों को भी ‘फायर सीजन’ के दौरान विशेष गश्त और सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए।
“हमारा लक्ष्य केवल आग बुझाना नहीं, बल्कि आग लगने की नौबत ही न आने देना है। जन-जागरूकता ही वनों के लिए सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है।”
संजीत मरकाम रेंजर वन विभाग, गंडई
ग्रामीणों ने लिया संकल्प
कार्यक्रम के अंत में बड़ी संख्या में उपस्थित ग्रामीणों, महुआ संग्राहकों और चरवाहों ने हाथ उठाकर संकल्प लिया कि वे न केवल स्वयं आग से बचेंगे, बल्कि दूसरों को भी जागरूक करेंगे। इस अवसर पर वन अमला, वन सुरक्षा समिति के सदस्य और क्षेत्र के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
