“आस्था की शक्ति और संघर्ष का संकल्प, पंडरिया भाठा में विराजे संकट मोचन, 10 हजार किसानों ने ली जल-जंगल-जमीन की रक्षा की शपथ।”

गंडई पंडरिया-जिला खैरागढ़-छुईखदान के अंतर्गत विचारपुर–पंडरिया भाठा का मैदान गुरुवार को एक अभूतपूर्व ऐतिहासिक घटनाक्रम का गवाह बना। यहाँ न केवल ‘किसान हनुमान संकट मोचन दक्षिणमुखी मंदिर’ में दिव्य प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई, बल्कि 55 गांवों के हजारों किसानों ने अपनी एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए प्रस्तावित सीमेंट फैक्ट्री के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का शंखनाद कर दिया।
7 क्विंटल के हनुमान और 1.5 किमी लंबी कलश यात्रा
सुबह से ही पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया। ओटेबंद से गाजे-बाजे के साथ लाई गई 7 क्विंटल वजन की भव्य हनुमान प्रतिमा को जब क्रेन की मदद से गर्भगृह में स्थापित किया गया, तो आकाश ‘जय श्री राम’ के उद्घोष से गूंज उठा। इस धार्मिक अनुष्ठान की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें 1500 से अधिक महिलाओं ने कलश यात्रा निकालकर सांस्कृतिक गौरव को जीवंत कर दिया। मुख्य यजमान गिरवर जंघेल, लुकेश्वरी जंघेल और वीरेंद्र जंघेल ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ प्राण प्रतिष्ठा की रस्म पूरी की।
10 हजार किसानों की गर्जना
धार्मिक अनुष्ठान के तुरंत बाद आयोजन स्थल एक विशाल ‘जन-आंदोलन’ के केंद्र में बदल गया। किसान अधिकार संघर्ष समिति के तत्वावधान में आयोजित महापंचायत में 10 हजार से अधिक किसानों ने हिस्सा लिया, जिनमें महिलाओं की संख्या लगभग आधी थी। 22 हजार वर्गफीट का पंडाल जनसैलाब के लिए छोटा पड़ गया।
महापंचायत के 3 बड़े फैसले:
(1) झुकेंगे नहीं: किसी भी सरकारी दबाव या धमकी के आगे किसान आत्मसमर्पण नहीं करेंगे।
(2)फैक्ट्री रद्द हो: जब तक प्रस्तावित श्री सीमेंट फैक्ट्री का प्रोजेक्ट रद्द नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।
(3)पोला पर अगली हुंकार: पोला तिहार के अवसर पर इसी स्थल पर अगली महापंचायत होगी, जिसमें पारंपरिक बैल दौड़ और गेड़ी दौड़ के जरिए संस्कृति और संघर्ष का प्रदर्शन किया जाएगा।

सर्वसमाज का समर्थन और प्रशासन को जवाब
समिति के संरक्षक गिरवर जंघेल और अध्यक्ष लुकेश्वरी जंघेल ने बताया कि यह मंदिर अब केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि किसानों के अस्तित्व की रक्षा का प्रतीक है। साहू, लोधी, यादव, निषाद, सतनामी, आदिवासी और वैष्णव समाज सहित सभी प्रमुख समाजों के अध्यक्षों और जनप्रतिनिधियों ने एक स्वर में इस आंदोलन को अपना समर्थन दिया।
विदित हो कि प्रशासन द्वारा मंदिर निर्माण को लेकर बाधाएं उत्पन्न करने की कोशिश की गई थी, लेकिन किसानों के फौलादी इरादों के सामने तंत्र को पीछे हटना पड़ा। संयोजक सुधीर गोलछा ने स्पष्ट किया कि यह संकल्प अब दूर तक गूंजेगा और जब तक किसानों को उनका हक नहीं मिल जाता, यह मशाल जलती रहेगी।
इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रियंका जंघेल, सुधीर गोलछा, मोतीलाल जंघेल, प्रमोद सिंह, मुकेश पटेल, मन्नू चंदेल सहित 25 से अधिक गांवों के सरपंच, समाज प्रमुख और हजारों की संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।
रिपोर्टर-विनोद नामदेव गंडई
