
गंडई में लावारिश कुत्तों का आतंक, 4 महीने में 256 लोग बने शिकार, प्रशासन ने तेज किया वैक्सिनेशन अभियान
गंडई पंडरिया- क्षेत्र में लावारिश कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। पूर्व में कुत्तों को मारने पर प्रतिबंध लगने के बाद इनकी संख्या में बेतहासा इजाफा हुआ है। आलम यह है कि कुत्ते झुंड बनाकर इंसानों और मूक जानवरों पर हमला कर रहे हैं। गंडई शहर में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक निशाने पर
गंडई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से मिले आंकड़ों के मुताबिक, 1 अप्रैल से 15 अगस्त के बीच महज साढ़े चार महीनों में 256 लोगों को लावारिश कुत्तों ने अपना शिकार बनाया है। अस्पताल पहुंचे सभी घायलों का तुरंत इलाज किया गया है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रशांत सोनी ने बताया कि लगातार डॉग बाइट की घटनाएं सामने आ रही हैं, और अस्पताल आने वाले हर पीड़ित को समय पर रैबीज का इंजेक्शन लगाया जा रहा है ताकि संक्रमण का खतरा न रहे।
नगर पंचायत की पहल, पकड़कर लगाया जा रहा रैबीजरोधी टीका
लगातार मिल रही शिकायतों और बढ़ते खतरे को देखते हुए नगर पंचायत ने एहतियातन कदम उठाए हैं। नगर पंचायत द्वारा लावारिश कुत्तों को पकड़कर उनका वैक्सिनेशन करवाया जा रहा है, जिससे रैबीज जैसी घातक बीमारी के फैलने का खतरा टाला जा सके। प्रभारी पशुचिकित्सा अधिकारी डॉ. योगेश कटारे के अनुसार, अब तक गंडई में 25 कुत्तों का वैक्सिनेशन किया जा चुका है।
बधियाकरण ही स्थायी समाधान
विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि केवल वैक्सिनेशन से कुत्तों की बढ़ती संख्या पर लगाम नहीं लगाई जा सकती। भोजन की तलाश और क्षेत्र पर वर्चस्व की लड़ाई के चलते कुत्तों में आक्रामकता बढ़ रही है। नगर पंचायत अध्यक्ष लाल टारकेश्वर शाह खुशरो ने बताया कि कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के लिए बधियाकरण (नसबंदी) जरूरी है। इसके लिए प्रयास किए गए थे, लेकिन वर्तमान में सेटअप के अभाव के कारण बधियाकरण फिलहाल संभव नहीं हो पा रहा है। इसी वजह से अभी कुत्तों को पकड़कर केवल वैक्सिनेशन कराने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
