
गंडई- गांव-गांव फैला नशे का जाल, पुलिस की कार्रवाई के बावजूद कोचियों के हौसले बुलंद
गंडई पंडरिया- क्षेत्र के ग्रामीण अंचलों में अवैध नशे का कारोबार जड़ें जमा चुका है। आलम यह है कि अब गांव-गांव में शराब और गांजे की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है, जिससे युवाओं और बच्चों का भविष्य अंधकार में डूब रहा है। एक ओर शासन-प्रशासन बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए करोड़ों की योजनाएं चला रहा है, वहीं दूसरी ओर पुलिस की नाक के नीचे पनप रहे ‘कोचिए’ इन दावों की हवा निकाल रहे हैं।
ताजा मामला: संबलपुर में घर की परछी में पिलाई जा रही थी शराब
थाना गंडई पुलिस ने अवैध शराब के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए ग्राम संबलपुर में दबिश दी। मुखबिर की सूचना पर प्रधान आरक्षक के नेतृत्व में टीम जब आरोपी रामअवतार निर्मलकर (29 वर्ष) के घर पहुंची, तो वहां अवैध रूप से शराब पिलाने की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही थी।
* जप्ती: पुलिस ने मौके से देशी शराब, खाली बोतलें, डिस्पोजल गिलास और पानी पाउच बरामद किए।
* कार्रवाई: आरोपी के पास कोई वैध दस्तावेज न होने पर पुलिस ने आबकारी एक्ट की धारा 36(C) के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया। चूंकि अपराध जमानती था, इसलिए मुचलके पर रिहा कर विवेचना जारी है।
बर्बाद होता बचपन और खोखला होता भविष्य
स्थानीय नागरिकों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि चंद पैसों के लालच में अवैध कारोबारी नशे का सामान परोस रहे हैं। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि स्कूली बच्चे और युवा इसकी चपेट में आ रहे हैं। इससे न केवल गांव का माहौल गंदा हो रहा है, बल्कि अपराधों में भी बढ़ोत्तरी हो रही है।
पुलिस की कार्रवाई और बेअसर कानून का डर
पुलिस समय-समय पर कार्रवाई कर आरोपियों को जेल भेजती है, लेकिन व्यवस्था की विडंबना देखिए कि जेल से बाहर आते ही ये अपराधी फिर से उसी अवैध धंधे में लिप्त हो जाते हैं। कोचियों के मन से कानून का खौफ खत्म होता दिख रहा है।
> बड़ा सवाल: > क्या केवल खानापूर्ति के लिए की जाने वाली गिरफ्तारियों से नशा मुक्त समाज का सपना पूरा होगा? जब तक इन कोचियों पर कड़ी नकेल नहीं कसी जाएगी, तब तक “देश का भविष्य” सुरक्षित नहीं है।
