
जल संकट की ओर अग्रसर शहर, फिर भी प्रशासन की आँखों पर बंधी पट्टी, प्याऊ बना ‘पानी बर्बादी का केंद्र’
गंडई पंडरिया- भीषण गर्मी की तपिश अभी शुरू ही हुई है कि गंडई में जल स्तर नीचे जाने लगा है। विडंबना देखिए, एक तरफ जमीन का सीना चीरकर पानी निकालने की होड़ मची है, वहीं दूसरी तरफ नगर पंचायत की नाक के नीचे ‘पंचरत्न शीतल पेयजल केंद्र’ से रोजाना हजारों लीटर अमृत तुल्य जल नालियों की गंदगी में मिल रहा है। महीनों से जारी इस बर्बादी पर निकाय की चुप्पी अब ‘प्रशासनिक लापरवाही’ नहीं, बल्कि ‘जल संहार की साजिश’ नजर आने लगी है।
अनवरत बह रहा पानी, फिर भी कुंभकर्णी नींद जिम्मेदार
बस स्टैंड जैसे व्यस्ततम इलाके में स्थित इस पेयजल केंद्र की छत पर रखी टंकियां जर्जर हो चुकी हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, यहाँ से 24 घंटे अनवरत रिसाव हो रहा है। जिसका गणित सीधा और डरावना है—हर 15 मिनट में एक बाल्टी पानी व्यर्थ नाले में बह कर जा रहा है। यानी महीने भर में लाखों लीटर पानी बिना किसी उपयोग के बहा दिया जा रहा है। सवाल यह उठता है कि क्या गंडई नगर पंचायत के पास एक प्लम्बर भेजने या सुधार करने तक की फुर्सत नहीं है?
झूठे आश्वासनों की भेंट चढ़ा ‘पंचरत्न’
मुख्य नगर पंचायत अधिकारी ने पहले भी ‘इंजीनियर भेजकर सुधार’ का राग अलापा था, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस है। हकीकत यह है कि आज भी पानी का रिसाव बंद नहीं हुआ है। अधिकारियों के ये खोखले दावे बताते हैं कि उन्हें जनता की प्यास और आने वाले संकट की कोई परवाह नहीं है।
निजी बोर की बाढ़: पाताल की ओर जाता जलस्तर
नगर में लगभग 30% घरों में और निजी बोर हो चुके हैं। बेतहाशा दोहन के कारण कुएं और बावड़ियां अभी से सूखने लगी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रशासन ने अपनी टंकियों से हो रही इस बर्बादी को नहीं रोका, तो आने वाले महीने में पूरा सरकारी जल ढांचा ठप हो जाएगा। तब जनता पानी के लिए तरसने पर मजबूर होगी।
कड़वा सच:- जिस शहर में लोग पानी सहेजने की अपील कर रहे हों, वहां सरकारी तंत्र का इस कदर संवेदनहीन होना ‘अपराधिक’ है। यह पानी केवल बह नहीं रहा, बल्कि उन प्यासे कंठों का हक छीना जा रहा है जो आने वाली मई-जून की गर्मी में पानी को तरसेंगे।
