
नशे की ‘गुपचुप’ खेती पर प्रशासन का प्रहार:कलेक्टर के निर्देश पर दुर्ग तहसीलदार प्रफुल्ल गुप्ता ने फेंसिंग वाले बाड़ों में दी दबिश, अब गंडई के रसूखदारों की बारी?
गंडई पंडरिया- मादक पदार्थों के अवैध कारोबार और प्रतिबंधित फसलों की खेती के विरुद्ध दुर्ग जिला प्रशासन अब ‘एक्शन मोड’ में आ गया है। कलेक्टर के सख्त निर्देशानुसार, जिले के तमाम राजस्व अधिकारी उन ‘हाई-प्रोफाइल’ कृषि फार्मों की कुंडली खंगाल रहे हैं, जो ऊँची दीवारों और कटीले तारों (फेंसिंग) से घिरे हुए हैं। इसी कड़ी में तहसीलदार प्रफुल्ल गुप्ता ने राजस्व अमले के साथ औचक निरीक्षण कर संदिग्ध बाड़ियों की जांच शुरू कर दी है।
तहसीलदार प्रफुल्ल गुप्ता की ‘ग्राउंड जीरो’ पर कार्रवाई
दुर्ग तहसीलदार प्रफुल्ल गुप्ता ने पटवारी और कोटवारों के साथ नगर निगम सीमा के अंतर्गत आने वाले ग्राम सिकोला के उन निजी फार्म हाउसों की सघन जांच की, जो पक्के बाउंड्रीवाल से घिरे हुए थे।
निरीक्षण का विवरण: जांच के दौरान खसरा नंबर 288/1, 288/4, 288/5, 286, 256, और 284/3 पर सरसों और गेहूं की फसल पाई गई।
अभियान का विस्तार: तहसीलदार गुप्ता ने स्पष्ट किया कि केवल सिकोला ही नहीं, बल्कि कार्हीडीह, रिसाली, डुंडेरा, बोरसी और पोतियाकला जैसे क्षेत्रों में भी फेंसिंग वाली जमीनों की कड़ाई से जांच जारी है। संदिग्ध फसल मिलने पर तत्काल पुलिस प्रशासन के समन्वय से कठोर कार्यवाही की जाएगी।
भाजपा नेता के ‘अफीम कांड’ के बाद जागा प्रशासन: क्या है अब तक का अपडेट?
प्रशासन की इस अचानक बढ़ी सक्रियता के पीछे हाल ही में हुआ एक सनसनीखेज खुलासा है। कुछ दिनों पूर्व एक भाजपा नेता के खेत में अवैध रूप से अफीम की खेती किए जाने का मामला उजागर हुआ था।
ताजा अपडेट: इस मामले में संलिप्त आरोपियों पर कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जा रही है और पुलिस उनके पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है। इसी कांड ने प्रशासन को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि फेंसिंग और ऊँची दीवारों की आड़ में ‘काले सोने’ (अफीम) का अवैध कारोबार फल-फूल सकता है। यही कारण है कि अब हर उस घेरे वाली बाड़ी पर नजर रखी जा रही है जहाँ बाहरी व्यक्तियों का प्रवेश वर्जित है।
अफीम की अवैध खेती: एक गंभीर ‘राजकीय और राष्ट्रीय अपराध’
यह समझना अनिवार्य है कि भारत में अफीम की खेती पूरी तरह से प्रतिबंधित है। केवल केंद्र सरकार के विशेष लाइसेंस के आधार पर ही औषधीय उपयोग के लिए इसकी सीमित खेती की जा सकती है।
राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा: शासन-प्रशासन की जानकारी के बिना अफीम उगाना न केवल राजकीय दोष है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ भी बड़ा खिलवाड़ है। ऐसी फसलों का उपयोग मादक पदार्थों की तस्करी के लिए किया जाता है, जो देश की युवा पीढ़ी को खोखला कर रहा है। पकड़े जाने पर इसमें गैर-जमानती धाराओं के तहत कठोर कारावास का प्रावधान है।
गंडई क्षेत्र के ‘फेंसिंग’ वाले खेत: क्या यहाँ भी होगी जांच?
दुर्ग की इस कार्रवाई की गूँज अब गंडई और आसपास के ग्रामीण अंचल में भी सुनाई देनी चाहिए।जिस प्रकार दुर्ग जिले के कलेक्टर ने जांच निर्देश दिए है उसी प्रकार केसीजी जिले के कलेक्टर द्वारा भी आदेश जारी किया जाना चाहिए क्योंकि-
गंडई का परिदृश्य: गंडई सहित आसपास एवम केसीजी जिले के क्षेत्रों में भी कई बड़े और रसूखदार किसान हैं, जिनके पास 20 एकड़ से अधिक के विशाल खेत हैं।
गोपनीयता का खतरा: इन खेतों के चारों ओर कटीले तारों का घेरा और सघन फेंसिंग लगी हुई है। सड़क से गुजरने वाले किसी भी व्यक्ति या राहगीर को यह पता ही नहीं चलता कि घेरे के भीतर वास्तव में कौन सी फसल उगाई जा रही है।
जनता की मांग: एहतियात के तौर पर गंडई क्षेत्र में भी दुर्ग कलेक्टर की तर्ज पर सघन जांच अभियान चलाया जाना चाहिए। प्रशासन को सुनिश्चित करना चाहिए कि विकास की आड़ में कहीं विनाशकारी नशे की खेती तो नहीं पनप रही।
प्रशासन की यह दबिश उन लोगों के लिए सीधी चेतावनी है जो कानून की आड़ में अवैध गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। तहसीलदार प्रफुल्ल गुप्ता के नेतृत्व में शुरू हुआ यह अभियान यदि गंडई जैसे संवेदनशील क्षेत्रों तक विस्तार पाता है, तो निश्चित रूप से नशे के सौदागरों के मंसूबों पर पानी फिर जाएगा।
