
प्राचीन शिव मंदिर घटियारी उपेक्षा का शिकार: लाखों खर्च के बावजूद बदहाल स्थिति!
गंडई पंडरिया- गंडई नगर से महज 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित प्राचीन शिव मंदिर घटियारी आज उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। कभी अपनी भव्यता और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाने वाला यह मंदिर परिसर, वर्तमान में साफ-सफाई और उचित देखरेख के अभाव में कबाड़ जैसा दिखने लगा है। चारों ओर उगी जंगली घास-फूस और झाड़ियों ने इसकी सुंदरता को पूरी तरह ढक दिया है।
मंदिर का ऐतिहासिक और स्थापत्य महत्व
यह प्राचीन शिव मंदिर उत्खनन कार्य के फलस्वरूप 1979 में टोले के रूप में प्रकाश में आया था। प्रस्तुत निर्मित यह मंदिर राजनांदगांव की गंडई तहसील में गंडई नगर से 3 किमी दूर, पश्चिम में बिरखा ग्राम में घटियारी ताल के किनारे पहाड़ी के ढाल पर स्थित है।
जिसमें मंडप, अंतराल खंड और गर्भगृह है। यह एक पूर्वमुखी प्राचीन शिवमंदिर है, जिसमें मंडप और गर्भगृह दो अंग हैं। सूचना पट्टिका के अनुसार इसका निर्माण लगभग 10वीं से 12वीं ईस्वी के बीच नागवंशी राजाओं के राजत्वकाल में हुआ था। यह क्षेत्रीय मंदिर वास्तु और समकालीन विकसित कला की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
मंदिर का गर्भगृह जलधारी पर शिवलिंग स्थापित है। मंदिर के द्वार शाखा अलंकृत है। प्रतिहार के रूप में शिव एवं घट पल्लव प्रतीक दोनों पार्श्व में बने हैं।
मंदिर के चारों ओर पेडेस्टलों पर नन्दी, गणेश, भैरव और उपासक-उपासिकाओं की प्रतिमाएं प्रदर्शित हैं। गर्भगृह के जलकुंभर द्वार चौखट पर घट पल्लव एवं कीर्ति मुख हैं।इस मंदिर परिसर में कई विनष्ट मंदिरों के भग्नावशेष विद्यमान हैं। इसके अतिरिक्त, परिसर में समकालीन में भी अन्य शिवमंदिरों का निर्माण होना रहा, जिनके अवशेष भी बिखरे पड़े हैं।
लाखों खर्च, फिर भी हालात ‘जस के तस’
पुरातत्व विभाग ने बीते कुछ वर्षों पहले इस मंदिर के सौंदर्यीकरण पर लाखों रुपये खर्च किए थे। परिसर में पत्थरों से सड़कें बनाई गई थीं और विभिन्न किस्म के फूल-पौधे लगाए गए थे, जिससे कुछ समय तक मंदिर की शोभा बढ़ी रही। परंतु, देखरेख के निरंतर अभाव में आज मंदिर की स्थिति फिर से पूर्ववत हो गई है।
ऐतिहासिक पत्थर बर्बादी की ओर
घटियारी मंदिर आदिकाल में बनाया गया एक भव्य मंदिर है, जो इतिहास और वर्तमान को जोड़ता है। किसी कारणवश यह आदिकाल में खंडित हो गया था, जिसे पत्थरों को जोड़कर कुछ हद तक पूर्ववत किया गया है।
सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि मंदिर परिसर में सैकड़ों की संख्या में मंदिर के नक्काशी किए हुए ऐतिहासिक पत्थर के टुकड़े बिखरे पड़े हैं। उचित देखरेख के अभाव में ये बहुमूल्य टुकड़े प्रकृति एवम असामाजिक तत्वों द्वारा और बर्बाद किए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि अगर समय रहते इन पत्थर के टुकड़ों को जोड़कर संरक्षित किया जाए, तो इस मंदिर की भव्यता में चार चांद लग जाएंगे।
अतः प्रशासन और संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग को इस ऐतिहासिक धरोहर की ओर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि लाखों के खर्च के बाद भी बनी हुई बदहाली को दूर किया जा सके और 10वीं-12वीं सदी का यह प्राचीन मंदिर अपनी गरिमा पुनः प्राप्त कर सके।
समिति तो बनी है परंतु नाम का
प्राप्त जानकारी अनुसार उक्त घटियारी मंदिर के देखरेख के लिए समिति बनाई गई है जिनके द्वारा महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर में मेले का आयोजन किया जाता है और समय समय पर अन्य गतिविधियां किया जाता है परंतु समिति द्वारा मंदिर में समुचित ध्यान नही देने के कारण आज मंदिर की स्थिति बदहाली की ओर है ।
जरूरत है
आज जरूरत है ऐसे स्वमसेवक संगठन या दूरदर्शी सोच के व्यक्तियों की जो निस्वार्थ भाव से मंदिर के रखरखाव,जीर्णोद्धार,और बेहतरी के लिए हर संभव प्रयत्न कर सके।
