
(रिपोर्टर-विनोद नामदेव गंडई)
गंडई में मानवीय त्रासदी! पति-पत्नी का ‘जुड़वाँ’ आधार नंबर: राशन बंद, बैंक खाता शून्य; क्या प्रशासन एक गरीब की मौत का इंतज़ार कर रहा है?

गंडई-पंडरिया-गंडई के टिकरीपारा निवासी आदिवासी दंपति सुकलु कुंजाम और कमला कुंजाम का जीवन किसी फिल्म की ट्रैजेडी से कम नहीं है। बांस की टोकरी बनाकर पेट पालने वाले इस मेहनतकश परिवार को, शासकीय सिस्टम द्वारा 20 साल पहले की गई एक भयावह तकनीकी चूक की सज़ा आज भुगतनी पड़ रही है। पति और पत्नी को एक ही आधार नंबर (UID) जारी होने के कारण, इनका राशन बंद है। यह सिर्फ़ एक गलती नहीं, बल्कि प्रशासन की असंवेदनशीलता का जीता-जागता प्रमाण है जिसने इस परिवार के विकास के सारे रास्ते बंद कर दिए हैं।
20 साल से ‘आधार’ का जहर पी रहा आदिवासी परिवार! एक ही UID
इस संकट की जड़ 20 साल पहले लगे पहले आधार शिविर में है। सुकलु कुंजाम का आधार कभी मिला ही नहीं। दो साल पहले जब मजबूरी में CSC सेंटर से उनका आधार निकाला गया, तो जो सामने आया वह सिस्टम पर सवाल खड़े करता है:-
■समान पहचान: सुकलु कुंजाम और कमला कुंजाम, दोनों का आधार नंबर बिल्कुल एक जैसा है।
■जन्मदिन की क्लोनिंग: दोनों के आधार कार्ड पर जन्मतिथि भी 23.04.1965— यानी एक ही दर्ज है!
सिस्टम इन्हें दो अलग इंसान मानने से इंकार कर रहा है, जिसके कारण सारी सरकारी योजनाएं इस परिवार के एक सदस्य के लिए पूरी तरह ठप हो चुकी हैं।
गरीब की थाली पर लगा सरकारी ताला!
इस ‘जुड़वाँ आधार’ के कारण परिवार की माली हालत बिगड़ी हुई है:
सुकलु कुंजाम को राशन नहीं मिल रहा है। सिस्टम एक ही UID के कारण उन्हें लाभार्थी मानने को तैयार नहीं है। बांस के काम से मुश्किल से गुज़ारा करने वाले इस परिवार की थाली से सरकारी चावल का निवाला छीन लिया गया है।
■आर्थिक अपंगता: आधार नंबर समान होने की वजह से सुकलु कुंजाम का बैंक में खाता नहीं खुल पा रहा है। सरकारी योजनाओं,मजदूरी का पैसा— कोई भी आर्थिक लाभ सीधे उनके पास तक नहीं पहुंच सकता। यह एक तरह की आर्थिक अपंगता है!
■आवास का हक भी छीना: आवास योजना का लाभ भी उन्हें नहीं मिला। लाभार्थी के रूप में पात्रता न मिलने पर, मजबूरी में घर उनकी बेटी रेखा कुंजाम के नाम पर घर बनवाना पड़ा।
इंस्टाग्राम में इस समांचार से सम्बंधित वीडियो देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए-
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गुहार से थक गए, पर अधिकारी सिर्फ ‘टाइमपास’ कर रहे हैं!
बेबस कुंजाम दंपति पिछले दो सालों से अपनी बेटी के साथ शासकीय कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। वे अधिकारियों, कर्मचारियों और नेताओं के पास गुहार लगा चुके हैं, लेकिन हर बार उन्हें केवल एक ही जवाब मिला है— “हो जाएगा, आश्वासन है!”
यह कितनी शर्मनाक बात है कि एक गरीब आदमी दो सालों से अपने मूल नागरिक अधिकार (राशन और बैंक खाता) से वंचित है, और प्रशासन एक आधार की गलती को सुधारने में इतना लंबा वक्त लगा रहा है। क्या इन अधिकारियों को इस बात का एहसास है कि उनकी एक फ़ाइल पर लगा विलंब का हर दिन, इस परिवार को परेशानियों की खाई में धकेल रहा है?
एसडीएम का जवाब !
इस गंभीर मामले पर जब अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, अविनाश ठाकुर से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि आपके माध्यम से जानकारी मिली है, आवेदन मंगवाया जाएगा । सम्बंधित विभाग से सम्पर्क कर आधार नम्बर जल्द ही सुधरवाया जाएगा।”
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