
महासंग्राम: विचारपुर में गूंजी खदान विरोधी हुंकार; कई गांवों के किसानों ने घर छोड़ मैदान में डाला डेरा, रक्त से लिखा विरोध का संकल्प!
गंडई पंडरिया:- क्षेत्र में श्री सीमेंट फैक्ट्री और प्रस्तावित खदानों के खिलाफ विरोध की ज्वाला अब धधक उठी है। शनिवार को ग्राम पंचायत विचारपुर का भाठा मैदान एक ऐतिहासिक गवाह बना, जहां कई गांवों के हजारों ग्रामीण अपने घरों में ताला लगाकर, सपरिवार जंग का ऐलान करने पहुंचे। यह महज एक बैठक नहीं, बल्कि अपनी माटी को बचाने के लिए किसानों का ‘करो या मरो’ का संकल्प था।
प्रशासन की नींद उड़ाने वाले महापंचायत के कई बड़े फैसले:
रक्तदान से महासंकल्प: ‘किसान अधिकार संघ’ द्वारा आयोजित शिविर में 27 युवाओं ने रक्तदान किया। किसानों ने दो टूक कहा— “आज समाज के लिए खून दे रहे हैं, कल अपनी उपजाऊ जमीन को बचाने के लिए भी खून बहाने को तैयार हैं।”
संकट मोचन मंदिर का निर्माण: खदान की काली नजर से अपनी त्रिफसलीय भूमि को बचाने के लिए उसी स्थान पर ‘संकट मोचन हनुमान’ का भव्य मंदिर बनाया जाएगा। इसके लिए सहयोग राशि भी जुटाई जा रही है।
नेताओं का बहिष्कार: सुधीर गोलछा ने स्पष्ट किया कि जो नेता खदान रद्द नहीं करा सकता,किसानों के हित मे बात नही कर सकता, उसे गांव में घुसने नहीं दिया जाएगा। प्रशासन से सीधा सवाल है— “बिना ग्राम सभा और किसानों की मर्जी के हमारी जमीन बेचने का हक किसने दिया?”
स्थायी समिति का गठन: हर परिक्षेत्र से सदस्यों को लेकर एक स्थायी कमेटी बनाई गई है, जो हर महीने महापंचायत कर रणनीति तय करेगी।
दलालों को खुली चेतावनी: मंच से किसानों को सचेत किया गया कि जमीन के भूखे दलालों को गांव से खदेड़ें। अपनी एक इंच जमीन भी कंपनी को न बेचें।
वक्ताओं के तीखे बाण: जो प्रशासन के दावों की धज्जियां उड़ाते हैं

“पानी मांगोगे तो तरसा देंगे”
सरपंच कैलाश वर्मा (संडी): “मैंने बलौदाबाजार के हालात देखे हैं। वहां लोग पानी के लिए तरस रहे हैं। उन्होंने धोखा खाया, पर हम नहीं खाएंगे। हम अपने क्षेत्र को सत्यानाश होते नहीं देख सकते।”
“बंजर हो जाएगी पुरखों की थाती”
पूर्व सरपंच कमल नारायण (सीताड़बरी): “जहां आज सोना उपज रहा है, उसे सीमेंट की धूल में नहीं मिलने देंगे। पथरिया बंजर हो गया, हमारा क्षेत्र भी वैसा ही हो जाएगा। जेल मंजूर है, पर खदान नहीं!”
“खेती उजाड़ने वाली फैक्ट्री नहीं, गन्ना-टमाटर मिल चाहिए”
कामदेव जंघेल: “बिना पूछे हमारी जमीन का रोडमैप तैयार करने वाली ताकत कौन है? हमें ऐसी फैक्ट्री नहीं चाहिए। अगर विकास करना है तो गन्ना या टमाटर मिल लगाओ, जिससे किसान खुशहाल हो।”
समाज की एकजुटता: ‘लड़ेंगे और जीतेंगे’
सुधीर गोलछा-इस आंदोलन को साहू समाज, लोधी समाज, यादव समाज और पिछड़ा वर्ग महासभा ने अपना पूर्ण समर्थन दिया है। किसान अधिकार संघ के तरफ से आभार जताते हुए कहा कि यह लड़ाई अब किसी एक गांव की नहीं, बल्कि समूचे किसान समाज के अस्तित्व की है।
दलालों और कंपनी को सीधी चेतावनी
किसान नेताओं ने साफ कहा कि पहले भी जनसुनवाई निरस्त कराकर किसानों ने अपनी ताकत दिखाई है। अब यह लड़ाई तब तक चलेगी जब तक परियोजना पूरी तरह रद्द नहीं हो जाती, चाहे इसमें साल लगे या दो साल।
पंचायत में प्रमुख रूप से शामिल चेहरे:
गिरवर जंघेल, मोतीलाल जंघेल, कामदेव जंघेल, श्रवण जंघेल (संचालक), सुधीर गोलछा, बलदाऊ जंघेल, कैलाश वर्मा, राजू ठाकुर, विजय वर्मा, संजू चंदेल, राजकुमार जंघेल, अशोक जंघेल, दशमत जंघेल, उत्तम जंघेल और सौरभ जंघेल।
