
bigbreking– धर्मनगरी में ‘ओयो’ संस्कृति का कथित काला बाजार, क्या प्रशासन की नाक के नीचे बिगड़ रहा है बचपन?
गंडई पंडरिया- जो गंडई क्षेत्र कभी अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए विख्यात था, आज वहां पनप रहे कुछ ‘अवैध’ कारोबारों ने गंभीर चिंता पैदा कर दी है। स्थानीय लोगों और सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार, क्षेत्र के कुछ स्थान और लाज अब मुसाफिरों की सेवा के बजाय ‘घंटे के हिसाब से’ अनैतिक गतिविधियों का केंद्र बनते जा रहे हैं।
शिक्षा के मंदिर पर ‘काले बाजार’ का साया
सूत्रों की माने तो सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इस कथित कारोबार की चपेट में स्कूल और कॉलेज जाने वाले युवा आने लगे हैं। बताया जा रहा है कि मात्र ₹500 से ₹1000 के लालच में नियमों को ताक पर रखकर घण्टे के हिसाब से रूम उपलब्ध कराए जा रहे हैं। नागरिकों का आरोप है कि चेहरे पर रुमाल बांधे युवक-युवतियों का इन लाजों में आना-जाना अब आम बात हो गई है, जिससे पूरे क्षेत्र का माहौल दूषित हो रहा है।
नियमों की ‘बलि’ और कागजी खानापूर्ति
नियमों के अनुसार, किसी भी लाज में ठहरने वाले व्यक्ति की पहचान और समय का विस्तृत ब्यौरा होना अनिवार्य है। परंतु, अपुष्ट सूत्रों का दावा है कि केवल ‘आधार नंबर’ नोट कर औपचारिकता पूरी की जा रही है। क्या उन आधार कार्डों की वास्तविकता जांची जा रही है? क्या वहां आने वाले लोग बालिग हैं? उनका नाम क्या है?उनका पता क्या है?इन सवालों पर गहरा पर्दा है।
जनता का आक्रोश और पुलिस से उम्मीद
ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी रोष है कि रसूख और ऊंचे संपर्कों की आड़ में यह खेल चल रहा है। लोगों का मानना है कि पुलिस प्रशासन को बिना किसी बाहरी दबाव के इन लाजों की आकस्मिक जांच करनी चाहिए। यदि आधार डेटा और सीसीटीवी फुटेज की बारीकी से जांच हो, तो बड़े खुलासे हो सकते हैं।
प्रशासन से ‘जनजागरण न्यूज़’ के सवाल
1- क्या गंडई क्षेत्र में संचालित लाजों की समय-समय पर प्रशासनिक जांच की जाती है?
2-क्या स्कूल/कॉलेज के आसपास ऐसे व्यापारिक केंद्रों पर निगरानी रखने की कोई योजना है?
3-क्या रसूखदारों के दबाव से मुक्त होकर पुलिस इन कथित अनैतिक गतिविधियों पर लगाम लगाएगी?
गंडई की जनता अब केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होगी, उसे ठोस कार्यवाही का इंतजार है ताकि उनके बच्चों का भविष्य सुरक्षित रह सके।
अंत मे लोगो द्वारा जो चर्चाएं हो रही है उसका सार ये है कि लाज या रुकने के स्थान का उपयोग अधिक्तर दूर दराज से आने वाले मुसाफिर करते है क्योंकि उनके पास रुकने का समुचित व्यवस्था नही रहता है परंतु गंडई क्षेत्र के आस पास जो लोग रहते है जिनका स्थायी घर है उन्हें लाज या अन्य स्थानों पर घण्टो के हिसाब से रुकने की क्या आवश्यकता आन पड़ती है एक आध बार तो समझ मे आता है परंतु बार बार घण्टो के हिसाब से रुकना सीधा सीधा अनैतिक गतिविधियों की ओर इशारा करता है।
इस सम्बंध में थाना प्रभारी राजेश देवदास से सम्पर्क करने पर उन्होंने बताया कि नियमित तौर पर क्षेत्र के सभी लाजो का रजिस्टर चेक किया जाता है।
वर्जन- ब्लाक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष शत्रुहन (मन्नू) चंदेल ने बताया कि मुझसे लोग यदा कदा मौखिक शिकायत करते है की गंडई क्षेत्र के किसी लाज में नाबालिक बच्चे जा रहे है और बिगड़ रहे है।पुलिस को इस ओर सज्ञान लेना चाहिए और सभी लाजो का बारीकी से जांच किया जाना चाहिए जैसे रजिस्टर ,आधार नम्बर और वहां लगे सीसीटीवी फुटेज ताकि सत्य सामने आ सके अगर ऐसा कृत्य किसी लाज में हो रहा है तो उस पर दण्डात्म कार्यवाही किया जाना चाहिए ताकि बच्चो का भविष्य सुरक्षित हो।
